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वर्तमान – 2000

साल 2010 – शाहरुख नेरोलैक के ब्रांड एंबेसडर बन गए। 2006 – जीएनपीएल के नाम को बदलकर कंसाई नेरोलैक कर दिया गया। 2004 से 2006 – लोटे और जैनपुर के कारखानों को क्रमशः ग्रीनटेक सुरक्षा पुरस्कार, गोल्ड और सिल्वर से सम्मानित किया गया। इन संयंत्रों को ओएचएसएएस18001 प्रमाणन भी दिया गया। नेरोलैक ब्रांड पर ध्यान केंद्रित करने के लिए श्री अमिताभ बच्चन को ब्रांड एंबेसडर के रूप में साइन किया गया। आकांक्षा फाउंडेशन के सहयोग से वंचित बच्चों की सहायता के लिए पहल की गई।.

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2000-1991

2000 आते-आते कंसाई पेंट्स द्वारा फोर्ब्स गोकक और उसके सहयोगियों की पूरी हिस्सेदारी के अधिग्रहण के बाद, कंपनी 1999 में कंसाई पेंट्स की सहायक कंपनी बन गई। इस अधिग्रहण के साथ कंपनी की शेयर पूंजी में कंसाई पेंट्स 64.52% का हिस्सेदार हो गया। नेरोलैक का जिंगल “जब घर की रौनक बढ़ानी हो” लोकप्रिय हो गया।

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1990- 1981

1983 में कंपनी ने बॉम्बे और पुणे में जीएनपी101 ऑटो पेंट्स को लॉन्च किया। इसे 24 मूल शेड्स की रेंज, मेटालिक रेंज के 12 शेड्स और वाइब्रेंट रेंज के 12 शेड्स के साथ लॉन्च किया गया। 1986 में जीएनपीएल ने कैथोडिक इलेक्ट्रोडिपोजिशन प्राइमर और ऑटोमोटिव उत्पादों के लिए अन्य परिष्कृत कोटिंग्स का निर्माण करने के लिए जापान की कंसाई पेंट्स कंपनी लिमिटेड के साथ ओसाका में एक टीएए पर हस्ताक्षर किए। जीएनपीएल भारत में इस तकनीक को पेश करने वाली पहली कंपनी थी।

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1980- 1950

1970 में स्माइलिंग (मुस्कुराते हुए) टाइगर गुडी को कंपनी के शुभंकर के रूप में लॉन्च किया गया। 1957 में कंपनी के नाम को बदलकर गुडलास नेरोलैक पेंट्स प्राइवेट लिमिटेड कर दिया गया। ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि कंपनी के नाम में, कंपनी के सबसे सफल उत्पाद के नाम को शामिल करना उचित समझा गया। 1968 में कंपनी पब्लिक (सार्वजनिक) हो गई और इसके नाम में से “प्राइवेट” शब्द को हटा दिया गया। 1950 में एंटी-गैस वार्निश कंपनी का सबसे लोकप्रिय उत्पाद था जिसका इस्तेमाल अधिकतर सेना के उपकरणों में किया जाता था।

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1920 के दशक की शुरुआत में

ब्रिटेन में नवंबर 1930 में तीन ब्रिटिश कंपनियों के विलय से गुडलास वॉल एंड लेड इंडस्ट्रीज़ ग्रुप लिमिटेड का उदय हुआ। बाद में यह लेड इंडस्ट्रीज़ ग्रुप (एलआईजी) लिमिटेड बन गया। अप्रैल 1933 में एलआईजी, लिवरपूल, इंग्लैंड ने कंपनी का अधिग्रहण किया और इसे गुडलास वॉल (इंडिया)
लिमिटेड नाम दिया। 1920 के दशक में अमेरिकी पेंट और वार्निश कंपनी को एलेन ब्रोस. एंड को. लि. नाम की एक इंग्लिश कंपनी ने खरीद लिया। जिसके बाद इसका नाम बदलकर गहागन पेंट्स एंड वार्निश को लि. कर दिया गया।

हमारे बारे में

1920 में मुंबई के लोअर परेल में गहागन पेंट्स एंड वार्निश अस्तित्व में आया। आज एक सदी बाद, यह कंपनी भारत की दूसरी सबसे बड़ी पेंट कंपनी होने के साथ-साथ उद्योग जगत के सबसे भरोसेमंद नामों में से एक है।

तो एक छोटी सी पेंट कंपनी से कंसाई नेरोलैक जैसे बड़े नाम तक पहुंचने के लिए क्या चाहिए?

इसके लिए मेहनत और जुनून चाहिए। प्रतिबद्धता और साहस चाहिए। इसके लिए बिना डरे नए प्रयोगों के साथ आगे बढ़ने की हिम्मत चाहिए। हर रोज़ नए जोखिम उठाने का दृढ़ संकल्प चाहिए, उनके सफ़ल होने पर जश्न मनाने की चाहत और असफल होने पर ड्रॉइंग बोर्ड उठाकर नए सिरे से काम पर लग जाने की ज़िद चाहिए। इसके लिए अपने काम और नए प्रयोगों के लिए डटे रहकर भी ग्राहकों की हर ज़रूरत के मुताबिक ढल जाने की आदत चाहिए। इसके लिए बेहतर शोध एवं विकास के साथ उन्नत तकनीक और समर्पित कर्मचारियों के समूह में निवेश चाहिए। लेकिन इसके लिए सबसे पहले अपने उत्पाद पर पूरा भरोसा और दृढ़ संकल्प होना सबसे ज़रूरी है।

इन्हीं खूबियों के चलते कंसाई नेरोलैक आज भारत की दूसरी सबसे बड़ी कोटिंग कंपनी होने के साथ-साथ इंडस्ट्रियल कोटिंग्स उद्योग में शीर्ष स्थान पर है।

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